सत्यवती वृतांत(भाग-१)

SATYAVATI STORY(PART-1)


नमस्ते! 
           जैसा की आप सबको पता है कि महाभारत हिंदी काव्य का एक सबसे बड़ा महाकाव्य है, और यह केवल महाकाव्य ही नहीं अपितु एक सच्ची घटना है जिसका वर्णन हमारे वेद पुराणों में मिल जाता है।  ओर इसमें वो सब निहित है जो एक परिवार, समाज, कुल, रीती और परम्परा  का सम्पूर्ण ज्ञान मिल जाता है। 
                  
             आज हम महाभारत के उस किरदार के बारे में बात करेंगे जो की अहम् किरदार रहा है महाभारत में यह किरदार रहा है सत्यवती का जो की एक निषाद राज की पुत्री है और आज हम इस कथा में उसी की कहानी का वर्णन करने वाले हैं जो कि कविता के रूप में लिखा है और यह किसी और से नहीं लिया गया अपितु खुद ही लिखा गया है।( Story By :- Amit Sahu :: Sketch By :- Krishna Sahu :: Reviewed By :- Manoj Sahu) 
         
              आज इस सत्यवती वृतांत के भाग - १ में हम देखेंगे की कैसे सत्यवती का जन्म हुआ तथा किस प्रकार से उसका बचपन रहा और क्या था सत्यवती के बचपन का नाम।  सम्पूर्ण जानकारी आपको इस कविता में मिलेगी। 
Hello!
As you all know that Mahabharata is one of the greatest epics of Hindi poetry, and it is not only an epic but a true event that is found in our Vedas. And therein lies all those who get complete knowledge of a family, society, clan, customs, and tradition.

Today we will talk about the character of Mahabharata who has been an arrogant character in the Mahabharata, who is the daughter of Satyavati who is the daughter of a Nishad Raj, and today we are going to narrate the story of her in this story which is a poem And it is not taken from anyone but himself. ( Story By- Amit Sahu, Sketch By- Krishna Sahu, Reviewed By- Manoj Sahu) 

Today in Part-1 of this Satyavati Story, we will see how Satyavati was born and how she had a childhood and what was the name of Satyavati's childhood. You will find all the information in this poem.



आओ में कथा सत्यवती बतलाऊं


हुए सुंधवा नाम के राजा 

हर्षित रहती प्रजा समाजा

एक दिवस आखेट गये जब

रानी रजस्वला हुई महल तब


रानी संदेशा दे जब ही

वन पक्षी माध्यम तब ही

राजा सुंधवा संदेशा पाये

शुक्र दिया दोने भिजवाये।


शुक्र लिया पक्षी उड़ा जब

दूजा पक्षी मिला उसे तब।

हुआ युद्ध दोनों के बीचे

दोना शुक्र गिरा तव नीचे।


जाकर शुक्र गिरा यमुना में 

एक अप्सरा रहती यमुना में।

थी वह शापित,देवन्ह त्यागी

रहती यमुना नीर अभागी।


निगला शुक्र जब मछली ने 

किया धारण गर्भ तव उसने ।

एक मछुआरा फैंका जाल नदी में

गर्भवती मछली फंसी उसी में।


जब निषाद मछली को चीरा 

निकरे बालक कन्या  वीरा।

हुआ निषाद अचम्भित ऐसा  

लेगया पास राजा को वैसा।


राजा रखा बालक निज पास

नाम रखा उसका मत्स्यराज ।

रह गई निषाद के पास तनुजा

पड़ा नाम मत्स्यगंधा अनुजा।


To Be Continue........ 

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                  महाभारत का युद्ध कुरु वंशियों के मध्य हुआ था जिसमें पितामह भीष्म, गुरु द्रोणाचार्य, कुल गुरु कृपाचार्य, अश्वत्थामा, राजा ध्रुपद, राजा विराट जैसे वीर योद्धा शामिल हुए थे। 

                  महाभारत जिसके बारे में कोई तो यह कहता है की यह एक परिवार में आपस में भाइयों की लड़ाई है तो कोई कहता है की ये अधर्म के विरुद्ध धर्म की स्थापना के लिए लड़ी गई लड़ाई है। परन्तु ये दोनों ही बातें सही हैं।  और तो और सच तो यह भी है कि सभी लोग अपना अपना नजरिया रखते हैं। 

                 अगर आप महाभारत के अभी तक जितने भी भाग आ चुके हैं उनको पढ़ना चाहते हैं तो आप हमारी महाभारत श्रृंखला को देख सकते हैं जिसमें महाभारत श्रृंखला के अभी तक के सारे भाग मिल जायेंगे। और हमारे पेज पर उपलब्ध स्टोरी, Poetry, शायरी को भी पढ़ सकते हैं। 
                  
The battle of Mahabharata was fought between the Kuru dynasty in which heroic warriors like Pitamaha Bhishma, Guru Dronacharya, Kul Guru Kripacharya, Ashwatthama, Raja Dhrupad, Raja Virat were joined.
Mahabharata, about which someone says that it is a fight between brothers in a family, and some say that it is a fight fought against unrighteousness to establish a religion. But both these things are true. Moreover, the truth is that all people have their own views.

If you want to read all the parts of Mahabharata which have come so far, then you can see our Mahabharata series, in which all the parts of Mahabharata series will be found. And you can also read Story, Poetry, Shayari available on our page.

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