सत्यवती वृतांत ( भाग - ४ ) 
SATYAVATI STORY ( PART - 4 )


             सत्यवती Story  भाग - ३ जो कि एक Mythological story है, में  हमने देखा था कि देवव्रत ने एक अटल प्रतिज्ञा ली, और सत्यवती का विवाह राजा शांतनु से हो गया। अब हम इस कड़ी को आगे बढ़ाते हुए,आज हम इस सत्यवती वृतांत के भाग - ४ में  देखेंगे कि किस प्रकार सत्यवती के पुत्रों का जन्म हुआ,और उनके क्या नाम हुए और शांतनु की मृत्यु पश्चात् सत्यवती के पुत्रों का जीवन और भरण पोषण कैसा रहा। किस प्रकार चित्रांगद की मृत्यु हुई। किस प्रकार विचित्रवीर्य  का विवाह हुआ और  किसके कहने पर पितामह भीष्म काशिराज में बिना आमंत्रण के स्वयंवर में जाते हैं। विचित्रवीर्य की मृत्यु कैसे होती है आपको इन सबकी जानकारी इस भाग में मिलेगी। अगर आपको इन सबके पहले की story नहीं पता है तो आप सत्यवती वृतांत भाग -१, सत्यवती वृतांत भाग -२,सत्यवती वृतांत भाग -३  को अवश्य पढ़ें। 

          In Satyavati Story Part - 3, Which is a Mythological Story, we saw that Devavrata took a firm promise, and Satyavati was married to King Shantanu. Now moving this link forward, today we will see in part - 4 of this Satyavati Story how Satyavati had sons, and What are their names were and how the life and sustenance of the sons of Satyavati after Shantanu died. How Chitrangad died How Vichitravirya got married and at whose suggestion Bhishma goes to the Swayamvara without invitation in Kashiraj. In this part, you will get information about how Vichitravirya dies. If you do not know the story before all this, then you must read the Satyavati Story Part-1, Satyavati Story Part-2, Satyavati Story Part-3.



Sketch By:- Mahi 

अब सत्यवती के दो पुत्र भये हैं ,
नाम चित्रांगद, विचित्रवीर्य रख गए हैं।  
जब शांतनु को मृत्यु  आई ,
तब थे बाल्यकाल में दोउ भाई। 

किये भीष्म फिर पालन पोषण उनका,
और राज्याभिषेक किया चित्रांगद का। 
एक वीर घमंडी  योद्धा था चित्रांगद ,
करने लगा तिरस्कार वो सब सांगत। 

हुआ युद्ध फिर दिन एक गन्धर्व से ,
गंधर्वराज नाम चित्रांगद समनाम से।  
चला युद्ध फिर वरष तीन को,
पाई वीरगति सोए गहरी नींद को। 

हुआ राज्याभिषेक अब विचित्रवीर्य का,
हुआ अधीन भीष्म के शासन उसका। 
चिंता विचित्रवीर्य के शादी की हुई अब, 
दिया सुझाव सत्यवती ने भीष्म को तब। 

भीष्म सत्यवती की आज्ञा मानें ,
कर अपहरण काशिराज से रानी ले आने। 
हुआ विवाह विचित्रवीर्य का दोउ रानी से,
लिप्त हुए भोग विलास मन वाणी से। 

अब तक उनका कोई पुत्र हुआ ना ,
तब राजयक्ष्मा (क्षय रोग ) विचित्रवीर्य को आना। 
खेलत चौसढ विचित्रवीर्य संग रानी,
मृत्यु तब  विचित्रवीर्य को आनी। 

To Be Continued...
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