जब नन्दी जी भी अपनी जगह से खसक गये


            आज की सच्ची कहानी (kahaani :- story ) है- नंदलाल की, नंदलाल एक ऐसे शिवभक्त थे जिन्हें बचपन से ही लगता था कि भगवान शिवजी उन्हें बुला रहे हैं। उनके माता-पिता बचपन से ही उन्हैं भगवान शिवजी से जुड़ी कहानियां सुनाते थे, इसलिए उन्हें लगता था कि भगवान शिवजी उन्हें बुला रहे हैं । भक्ति के रूप में नंदलाल शिवजी के बेहद करीब आ चुके थे पर उन्होंने कभी भगवान शिवलिंग को कभी छुआ भी नहीं था क्योंकि वह एक बंधुआ मजदूर थे और समाज में अछूत जैसा जीवन जी रहे थे।

                बचपन से ही नंदलाल को भगवान शिव के प्रति एक उत्साह एक कौतूहल था। बंधुआ मजदूर होने की वजह से उसे शिव (shiv ji) मंदिर तक जाने की इजाजत भी नहीं थी। नंदलाल के मन में भगवान शिव का विचार उसमें एक नई उमंग भर देता था। नंदलाल जहाँ रहते थे, वहां से करीब 25 किलोमीटर दूर भगवान शिव का एक मंदिर था, और नंदलाल को लगता था कि भगवान शिवजी उन्हें बुला रहे हैं। वह हमेशा उस मंदिर में जाना चाहते थे पर एक बंधुआ मजदूर के जीवन पर उसका अपना ही अधिकार नहीं होता है । जमीदार की इजाजत के बगैर वह कहीं नहीं जा सकते थे। उन्होंने जमींदार को अनेकों बार कहा कि वो सिर्फ एक बार 1 दिन के लिए उस मंदिर के में जाना चाहते हैं।लेकिन जमींदार हर बार उन्हें मना कर देता।

                  जमींदार कहता -- खेतों में बहुत काम है। तुम मेरा एक दिन भी खराब नहीं कर सकते हो। जमींदार के बार-बार मना करने पर भी उसके शिवजी के दर्शन की इच्छा, लगन कम नहीं हुई बल्कि उनकी भगवान शिव के प्रति जिज्ञासा और बढ़ती गई, उन्हें तो बस एक बार शिव को देखना था कि वह कैसे दिखते हैं। अगले दिन एक नए उत्साह और ऐसे गौरव के साथ उसने जमीदार से फिर से मंदिर जाने को पूछा। ऐसा गौरव जो एक बंधुआ मजदूर में बिल्कुल नहीं होता। जमींदार ने फिर मना कर दिया।

                नंदलाल ने कहा कहां -- मैं कल जाना चाहता हूं। मैं आज ही सारा काम पूरा कर लूंगा । बस एक ही दिन की तो बात है। इस बार जमींदार ने उसकी बात मान ली। जमींदार ने कहा -- तुम जा तो सकते हो लेकिन कल सुबह जाने से पहले तुम्हें 40 एकड़ जमीन की जुताई करनी होगी तभी तो शाम तक के लिए जा सकोगे वरना नहीं। ऐसा कहकर जमींदार वहां से चला गया। नंदलाल जानते थे कि एक रात में 40 एकड़ जमीन जोतना किसी के लिए भी संभव नहीं है। इसलिए उन्होंने यह मूर्खतापूर्ण प्रयास ही नहीं किया और रात को सोने चले गए। मगर उस रात भी शिवजी का विचार उनके रोम रोम में एक नई ऊर्जा भर रहा था। उन्होंने सोचा कि कल चाहे जो भी हो, शिव मंदिर तो जाना ही है, ऐसा सोचकर वह सो जाते हैं ।

                   सुबह जब नंदलाल उठते हैं, तो देखते हैं कि सारे गांव में हंगामा मच रहा है। शोर सुनकर नंदलाल अपनी झोपड़ी से बाहर आते हैं। तो यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि सारी की सारी 40 एकड़ जमीन जती पड़ी है। जमींदार यह सब देखकर हैरान था और वह नंदलाल के पैरों में आ गिरा। और उस गरीब मजदूर के साथ जो हो रहा था उसके लिए वह सब हैरान कर देने वाला था। सभी नियम टूट चुके थे। जमींदार मजदूर के पैरों में पढ़ा था। सभी यह देखकर हैरान थे कि 40 एकड़ जमीन एक रात में किसने जौति है। उन्होंने इससे पहले इतना बड़ा चमत्कार कभी नहीं देखा था। सभी गांव वाले उसके चरणों में थे। सभी ने उसे कुछ ना कुछ दिया। किसी ने भोजन तो किसी ने सिक्के। सभी ने कहा -- यह मंदिर जा रहा है ईश्वर ने खुद इसे चुना है। स्वयं शिवजी ने आकर इसके लिए 40 एकड़ जमीन को जोता है।

                    लोगों की अपार प्यार के साथ वह आनंद भरे दिल से मंदिर जाने की ओर बढ़ा और बहुत पैदल चलने के बाद वह आखिर मंदिर पहुंच ही गया। मंदिर के बाहर खड़े हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए। सारा जीवन एक अछूत की तरह जीने के कारण वह भूला नहीं था कि मंदिर का पुजारी उसे आसानी से मंदिर के अंदर जाने नहीं देगा। नंदलाल उदास और निराश मन से वहीं मंदिर के बाहर खड़ा हो गया और बाहर से ही शिवलिंग को देखने की कोशिश करने लगा। फिर जो हुआ दोस्त वह सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे।

                    दोस्तों शिवलिंग के ठीक सामने बैठा नंदी (nandi ji) वहां से दूसरी ओर खिसक गया और नंदलाल ने शिव जी के दर्शन किए। पत्थर से बना भारी नंदी एक और खिसक गया। यह देखकर वहां के पुजारी और बाकी लोग हैरान रह गए। मंदिर के बाहर खड़ा वो गरीब मजदूर दोनों हाथ उठाये, हर हर महादेव चिल्ला रहा था। इस घटना के बाद उस गरीब मजदूर का नाम नंदलाल पड़ा। पहले उसका कोई नाम ही नहीं था। उसे एक साधारण सा बंधुआ मजदूर के रुप में जाना जाता था और इस घटना के बाद वह एक मशहूर संत बन गए ।

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