अमावस्या / फाल्गुन अमावस्या (Know All About This Auspicious Day)



जानिए अमावस्या क्या है ? 

               हर महीने में तीस तीथियां होती हैं। उनमें से, महीने के मध्य का दिन अमावस्या के रूप में मानाया जाता है जिसे नो-मून डे भी कहा जाता है। इस विशेष दिन पर, चंद्रमा दिखाई नहीं देता है। इसे पूरे महीने की सबसे अंधेरी रात माना जाता है| जिसे अमावस्या कहते हैं। 

               अमावस्या के दिनों को अशुभ कहा जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है की इस समय बुरी और नकारात्मक शक्तियां पृथ्वी पर सबसे मजबूत होती हैं और राज करती हैं। यह दिन बहुत महत्व रखता है क्योंकि लोग अपने पूर्वजों या पितरों का श्राद्ध और तर्पण करके उनका स्मरण करते हैं और  अपने पूर्वजों के लिए आभार व्यक्त करते हैं।


फाल्गुन अमावस्या क्या है?

               पंचांगों के अनुसार फाल्गुन के विशिष्ट महीने में मनाई जाने वाली अमावस्या, जिस दिन कोई चांद नहीं दिखाई देता ओर सम्पूर्ण रात्री पुर्ण अन्धेरी होती है, को फाल्गुन अमावस्या कहा जाता है। माना जाता है कि अमावस्या के दिन देवताओं का निवास संगम तट पर होता है। इस दिन प्रयाग संगम पर स्नान का भी विशेष महत्व है। यह दिन कैलेंडर के अनुसार अप्रैल या मार्च के महीने में आता है।

2021 में फाल्गुन अमावस्या कब है ? 

पंचागों के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है।  

वर्ष 2021 में फाल्गुन अमावस्या 13 मार्च, दिन शनिवार को है। 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह अमावस्या दुख, दरिद्रता से मुक्ति और कार्यों में सफलता दिलाती है। 


फाल्गुन अमावस्या तिथि 2021 और शुभ मुहूर्त:--

तिथी --- फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को है।  
फाल्गुन अमावस्या --- दिनांक  -13 मार्च  2021,  दिन --शनिवार  
अमावस्या प्रारंभ --- 12 मार्च 2021 को दोपहर  03:04 बजे से 
अमावस्या समाप्त ---  13 मार्च 2021 को दोपहर 03:52 बजे तक।

फाल्गुन अमावस्या का महत्व:--

               फाल्गुन अमावस्या पितरों को मोक्ष दिलाने वाली होती है। पितरों की शांति के लिए किए जाने वाले दान, तर्पण, श्राद्ध आदि के लिए यह दिन बहुत ही अच्छा माना जाता है। यदि निरंतरता में प्रत्येक अमावस्या को आप पितरों हेतु श्राद्ध नहीं कर पाते हैं तो कुछ अमावस्याएं विशेष तौर पर सिर्फ श्राद्ध कर्म के लिए शुभ मानी जाती हैं। फाल्गुन मास की अमावस्या उन्हीं में से एक है। सिर्फ श्राद्ध कर्म ही नहीं बल्कि कालसर्प दोष के निवारण हेतु भी अमावस्या का विशेष होता है।

फाल्गुन अमावस्या के अनुष्ठानों को करने से, पितृ दोष को ठीक किया जा सकता है और साथ ही पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।

फाल्गुन अमावस्या के अनुष्ठान क्या हैं और कैसे करते हैं  ? 

• इस दिन, लोग सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं और फिर सुबह पूजा पाठ करते हैं।
 
• फाल्गुन अमावस्या की पूर्व संध्या पर, लोग मृत पूर्वजों या पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध अनुष्ठान करते हैं। 

• श्राद्ध समारोह या तो पवित्र नदियों के किनारे या मंदिरों या घरों में किए जाते हैं। एक बुद्धिमान पुजारी मृत पूर्वजों की पूजा करता है और उनके उद्धार और शांति के लिए प्रार्थना करता है।
 
• लोग श्राद्ध समारोह के एक भाग के रूप में मृत पितरों को धूप, फूल, पानी और जौ का मिश्रण तथा दीया अर्पित करते हैं।
 
• पूर्वजों के दिव्य आशीर्वाद की मांग के लिए तिल दान और पिंड तर्पण का अनुष्ठान भी किया जाता है।
 
• तर्पण और अन्य विभिन्न श्राद्ध अनुष्ठानों के साथ पूरा होने के बाद, ब्राह्मणों को विशेष भोजन कराया जाता है। 

• ब्राह्मणों को भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान किया जाता है। 

• लोग फाल्गुन अमावस्या का व्रत भी रखते हैं। 

अमावस्या के दिन क्या करें :--- 

• अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी भी पवित्र नदी में स्नान करें। अगर ऐसा ना हो सके तो घर में ही पानी में गंगाजल डालकर उससे स्नान करें।  

• फाल्गुन अमावस्या के दिन जरूरतमंदों को दान पुण्य करें। ऐसा करने से पितृ देवता  प्रसन्न  होते हैं और घर के सारे क्लेश दूर होते है।
 
• फाल्गुन अमावस्या के दिन शाम को पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करें और अपने पूर्वजों का ध्यान करें और उनकी शांति के लिए मन में प्रार्थना करें। 

• फाल्गुन अमावस्या के दिन भगवान विष्णु और अग्नि देवता की पूजा करें और इस दिन देवी देवता और ब्राह्मणों को अन्न, दही और पूरी का भोग लगाएं। 
 
• फाल्गुन अमावस्या के दिन भगवान शिव के मंदिर में जाकर  भगवान की पूजा कर प्रार्थना करें और फिर उनकी दूध, दही और शहद से अभिषेक करें।  

• फाल्गुन अमावस्या के दिन भगवान शिव को काला तिल भी अवश्य चढ़ाएं। 

फाल्गुन अमावस्या के दिन क्या नहीं करना चाहिए :--

1. फाल्गुन अमावस्या के दिन गर्म पानी से स्नान ना करें बल्कि सामान्य जल से ही स्नान करें।

2. फाल्गुन अमावस्या के दिन किसी भी तरह का गलत और बुरा काम नहीं करना चाहिए । 

3. इस दिन जितना हो सके देवी देवताओं की भक्ति करें। 

4. फाल्गुन अमावस्या के दिन किसी भी तरह का तामसिक और मांस मदिरा वाला भोजन नहीं करना चाहिए। 

फाल्गुन अमावस्या की कथा :--

               पौराणिक कथा के अनुसार एक बार दुर्वासा ऋषि ने क्रोध में आकर इंद्र और सभी देवताओं को श्राप दे दिया था। जिसके कारण सभी देवता कमजोर हो गए। इस मौके का फायदा उठाकर दैत्यों ने देवताओं पर आक्रमण कर दिया और उन्हें परास्त कर दिया था।
 
               जिसके बाद सभी देवता भगवान विष्णुजी के पास पहुंचे और भगवान विष्णु को इसके बारे में बताया तब उन्होंने देवताओं को सलाह दी की वह दैत्यों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करें। 

               जिसके बाद सभी देवताओं ने दैत्यों के साथ संधि कर ली और अमृत को प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन करने लगे। जब अमृत निकला तो इंद्र का पुत्र जयंत अमृत कलश को लेकर आकाश में उड़ गया। जिसके बाद दैत्यों ने जयंत का पीछा किया। जिसके बाद दैत्यों ने अमृत को प्राप्त कर लिया। 

               अमृत को लेकर देवताओं और दानवों में बारह दिन तक युद्ध चला। जिसके कारण प्रयाग, हरिद्वार, उजैन और नासिक पर कलश से अमृत की बूंदे गिरी थी। उस समय चंद्रमा, सूर्य, गुरु,शनि ने घट की रश्रा की थी। 

               इस कलह को बढ़ते देख भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप रखा और देवताओं को छल से अमृत पीला दिया। इसी कारण से अमावस्या के दिन इन जगहों पर स्नान करना अत्यंत ही शुभ माना जाता है।

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