जानिये इस चैत्र मास में कब है राम नवमी दिनांक, तारीख, शुभ मुहूर्त इत्यादि। Know All about RAM NAVAMI Date, Time and Auspicious occasion etc.



श्री रामनवमी क्यों मनायी जाती है :--

               भगवान श्रीराम को भगवान विष्णु के 10 अवतारों में 7 वां अवतार माना जाता हैl राम नवमी का संबंध भगवान विष्णु के मर्यादा पुरुषोत्तम अवतार भगवान श्री राम से है। भगवान विष्णु ने अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करने के लिये हर युग में अवतार लिया है। इन्हीं में एक अवतार उन्होंने भगवान श्री राम के रुप में लिया था। जिस दिन भगवान श्री विष्णु जी ने राम के रूप में राजा दशरथ के यहां माता कौशल्या की कोख से जन्म लिया वह दिन चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी का दिन था। यही कारण है कि इस तिथि को रामनवमी के रूप में मनाया जाता है। यह चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन भी होता है।

2021 में रामनवमी कब है 

               चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी का पर्व में मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष राम नवमी 21 अप्रैल 2021 को मनाई जाएगी। इस तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भगवान राम का जन्म हुआ था। यही कारण है कि इस तिथि को राम नवमी कहा जाता है और भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। भक्त इस दिन भक्ति भाव से राम जी का पूजन अर्चन करते हैं। जानिए रामनवमी का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

नवमी तिथि शुभ मुहूर्त-

 
चैत्र शुक्ल नवमी तिथि आरंभ     --     21 अप्रैल 2021 को रात 12 बजकर 43 मिनट से 
 
चैत्र शुक्ल नवमी तिथि समापन  --     22 अप्रैल को रात्रि 12 बजकर 35 मिनट पर 
 

राम नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त

 
पंचांग के अनुसार पूजा का मुहूर्त 21 अप्रैल को सुबह 11 बजकर 02 मिनट से दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।

पूजा मुहूर्त की कुछ अवधि    --     02 घंटे 36 मिनट 

जानिए भगवान श्रीराम ने क्यों जन्म लिया :--

               पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान राम का जन्म त्रेता युग में हुआ था। उनके जन्म का एकमात्र उद्देश्य मानव मात्र का कल्याण करना, मानव समाज के लिए एक आदर्श पुरुष के रूप में मिसाल पेस करना और अधर्म का नाश कर धर्म की स्थापना करना था। यहां धर्म का अर्थ किसी विशेष धर्म के लिए नहीं बल्कि एक आदर्श कल्याणकारी समाज की स्थापना से है।

जानिए कैसे हुआ भगवान श्री राम का जन्म :--

               राजा दशरथ जिनका प्रताप दसों दिशाओं में व्याप्त था। उन्होंने तीन विवाह किए थे लेकिन किसी भी रानी से उन्हें संतान की प्राप्ति नहीं हुई। ऋषि मुनियों से जब इस बारे में विमर्श किया तो उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ करवाने की सलाह दी। पुत्रेष्टि यज्ञ करवाने के पश्चात ऋषियों द्वारा राजा को प्रसाद स्वरूप खीर प्रदान की गयी और राजा को आज्ञा की इस प्रसाद को अपनी पत्नी को खिलाओ । राजा दशरथ ने वो प्रसाद अपनी प्रिय पत्नी कौशल्या को दे दिया।

               कौशल्या ने उसमें से आधा हिस्सा केकैयी को दिया इसके राजा दशरथ जिनका प्रताप 10 दिशाओं में व्याप्त रहा। उन्होंने तीन विवाह किए थे लेकिन किसी भी रानी से उन्हें पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई। ऋषि मुनियों से जब इस बारे में विमर्श किया तो उन्होंने पुत्रेष्टि यज्ञ करवाने की सलाह दी। पुत्रेष्टि यज्ञ करवाने के पश्चात यज्ञ से जो खीर प्राप्त हुई उसे राजा दशरथ ने अपनी प्रिय पत्नी कौशल्या को दे दिया। कौशल्या ने उसमें से आधा हिस्सा केकैयी को दिया इसके पश्चात कौशल्या और केकैयी ने अपने हिस्से से आधा-आधा हिस्सा तीसरी पत्नी सुमित्रा को दे दिया। उन सभी रानियों ने इस खीर का सेवन किया।
 

कब हुआ भगवान श्रीराम जी का जन्म :--

               चैत्र शुक्ल नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र एवं कर्क लग्न में माता कौशल्या की कोख से भगवान श्री राम का जन्म हुआ। केकैयी से भरत ने जन्म लिया तो सुमित्रा ने लक्ष्मण व शत्रुघ्न को जन्म दिया।  

भगवान श्री राम के बारे में :--

               भगवान श्री राम को मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। उन्हें पुरुषोत्तम यानि श्रेष्ठ पुरुष की संज्ञा दी गयी है। अनेक उदाहरण हैं जहां वे अपनी पत्नी सीता के प्रति समर्पित व उनका सम्मान करते नज़र आते हैं। वे समाज में व्याप्त ऊंच-नीच को भी नहीं मानते। शबरी के झूठे बेर खाने का और केवट की नाव चढ़ने का उदाहरण इसे समझने के लिए सर्वोत्तम है।
 
               वेद शास्त्रों के ज्ञाता और समस्त लोकों पर अपने पराक्रम का परचम लहराने वाले, विभिन्न कलाओं में निपुण लंकापति रावण के अंहकार के किले को ध्वस्त करने वाले पराक्रमी भगवान श्री राम का जन्मोत्सव देश भर में धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्री राम की भक्ति में डूबकर भजन कीर्तन किए जाते हैं। 

कैसे मनायी जाती है श्री रामनवमी :--

  1. राम नवमी के दिन भक्तो द्वारा रामचरित मानस का पाठ करवाया जाता है।
  2. भक्तो द्वारा श्रीराम जी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में विशाल रैली ओर शोभा यात्रा निकाली जाती है।
  3. जगह जगह भक्तों का पुष्प वर्षा और पुष्प मालओं के साथ फलाहार और स्वल्पाहार कराकर स्वागत किया जाता है।
  4. श्री राम स्त्रोत का पाठ किया जाता है। 
  5. भगवान श्री राम की प्रतिमा को झूले में भी झुलाया जाता है। श्रीराम कथा का आयोजन किया जाता है।
  6. जगह जगह भंडारे का आयोजन किया जाता है।
  7. रामनवमी को उपवास भी रखा जाता है।
मान्यता है कि रामनवमी का उपवास रखने से सुख समृद्धि आती है और पाप नष्ट होते हैं।

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