गायत्री मंत्र से होने वाले फायदों को जरूर जान लो… (Know all about Gayathri Mantra Benefits)

Pic - Gayatri Mantra

            गायत्री मंत्र सिर्फ भगवान की अराधना करने का मंत्र नहीं है। गायत्री मंत्र साइंस को ध्यान में रखकर बनाया गया वह अनमोल मंत्र है जिसकी वैज्ञानिकता के बारे में जब पता लगा तब साइंटिस्ट भी हैरान रह गए। 

            गायत्री मंत्र हम स्कूल टाइम से उच्चारण करते आ रहे हैं पर हमें क्या कभी जाना कि उसका वास्तविक अर्थ (Meaning) क्या है ? कितनी गहराई है उसमें, उसकी क्या साइंस है ?

            हम उस समय में जी रहे हैं जहाँ एक तरफ वह लोग हैं जो पुराणों को समझना ही नहीं चाहते।पहले टेक्नोलॉजी नहीं थी, इसलिए पुराणों की बात पर भरोसा ही नहीं उनको सब काल्पनिक लगता है।और एक तरफ वो लोग हैं जो पुराणों और वेदों की बातों को श्रद्धा की वजह से आँख बंद करके हर बात मान लेते हैं।

गायत्री मंत्र का उच्चारण कैसे करते हैं -- 

ॐ भूर्भुवः स्वः ||
तत्सवितुर्वरेण्यम भर्गो देवस्य धीमहि ||
धियो यो नः प्रचोदयात् ||

इस मंत्र को हम ध्यान करते हुए और जाप करते हुए उपयोग में लाते हैं। 

            गायत्री मंत्र आठ-आठ अक्षरों की तीन पंक्तियों में बहुत अच्छे से मोतियों की तरह पिरोया गया है। गायत्री मंत्र की शुरुआत ॐ से होती है। जिसका मतलब है वह ऊर्जा जिसने पूरे ब्रह्मांड को बनाया है। जो परब्रह्म है, परमात्मा है। 

भू:   --   भूमी लोक
भुव: --  अन्तरिक्ष लोक
स्व:  --   स्वर्ग लोक 

            भू मतलब भूमि लोक, भुव: मतलब अंतरिक्ष लोक, स्व: मतलब स्वर्ग लोक। यह तीन शब्द गायत्री मंत्र में यह बताते हैं कि हम अपनी एनर्जी को भूमि से स्वर्ग मतलब नीचे से ऊपर ले जा सके। आध्यमिक भाषा में इसका मतलब स्थूल  से सूक्ष्म में हम ले जा सके।
 
इस मंत्र में धीमहि शब्द का अर्थ है हम लोग ध्यान करते हैं आराधना करते हैं। हम किस पर ध्यान और आराधना करते हैं ?

तत् भर्ग: -- मतलब प्रतिभा और गुणों पर, यह प्रतिभा गुण किस तरीके के हैं ?

वरेण्यं भर्ग:  -- मतलब यह प्रतिभा और गुण सर्वश्रेष्ठ हैं, ये सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा और गुण किसके हैं ?

देवस्य  -- मतलब जो बहुत दिव्य है जो बहुत चमकदार है सूरज की तरह। यह बहुत दिव्य और चमकदार कौन हैं ?

सवितु  देवस्य -- मतलब जिन्होंने इस संसार की रचना करी। जिन्होंने हमें और सारे जीव जंतुओं को जन्म दिया हम उनकी आराधना उन पर ध्यान क्यों करते हैं ?

प्रचोदयात् --- ताकि वह प्रेरित कर सकें और चला सकें। किसको चला सकें ?

न: धिय: --- मतलब हमारे दिमाकों  को। किस दिशा में प्रेरित कर सके और चला सके ?
जैसे कि मैंने आपको शुरुआत में भी बताया -

भू भुव: स्व: --- मतलब हमारे सारे कष्टों का निवारण कर सके हमें सकारात्मक ऊर्जा भर सकें और हमें सही तरीके से सफलता के मार्ग में मार्गदर्शन कर सकें।

तो गायत्री मंत्र का मतलब क्या हुआ ?


            जिन्होंने हमें जन्म दिया, जीवन दिया। हम उस सर्वश्रेष्ठ परमात्मा जो सूर्य की तरह चमकदार है उनका ध्यान करते हैं। ताकि हमें उनकी ऊर्जा का भाग मिल सके और वह हमारे मस्तिष्क को ऊर्जावान बनाए। हमारे जीवन से बुराइयों को नष्ट करें। हमें सकारात्मक बनाए और हमारा सही तरीके से सफलता के मार्ग में मार्गदर्शन करें। 

गायत्री मंत्र का एक विस्तृत वर्जन भी है।  


ॐ भु: ॐ भुव: ॐ स्व: ।
ॐ मह: ॐ जन: ॐ तप: ॐ सत्यम् ।
ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यधीमहि ।
धियो यो न: प्रचोदयात् ।।
ॐ आपो ज्योति रसोअमृतं ब्रह्म भूभुर्व: स्वर ॐ।।


            गायत्री मंत्र के शब्दों का अर्थ तो मैं आप लोगों को पहले ही बता चुका हूं, इस विस्तृत (Longer) वर्जन में जो दो अतिरिक्त (Extra) लाइन हैं उनके बारे में हम जानते हैं। 

ॐ मह: ॐ जन: ॐ तप: ॐ सत्यम् । 

इनका संबंध हमारे साथ बहुत महत्वपूर्ण कुंडलिनी चक्रों से है और आखिरी में
ॐ आपो ज्योति रसोअमृतं  ब्रह्मा भुभुर्व: स्वर ॐ --- 

मतलब तीनो लोक और सब कुछ जो इस संसार में है सब  इस ओम की ध्वनि में समाया हुआ है । 

            इस मंत्र को संध्या के समय योग क्रिया प्राणायाम करते समय करते हैं। इस मंत्र के बारे में यजुर्वेद के तेत्रीय अरण्यक में दिया गया है।

            गायत्री मंत्र को ऋग्वेद के अनुसार सावित्री माता को समर्पित किया है । सावित्री माता जो पांचों तत्व जिनसे ब्रह्मांड बना है उनके भगवान हैं । गायत्री माता को वेदों की माता कहा जाता है । हमारे शरीर में बड़े छोटे दिखने वाले और ना दिखने वाले कई तरीके की ग्रंथियां मतलब ग्लेन्ड्स हैं । इन ग्लेन्ड्स में बहुत स्पेशल एनर्जी होती हैं । इनमें से षटचक्र मतलब सिक्स सेंटर एनर्जी ग्लैंड बहुत प्रसिद्ध है । गायत्री मंत्र के अक्षरों के उच्चारण से इन ग्लैंड पर प्रभाव पड़ता है और वो एक्टिवेट हो जाते हैं । 

            गायत्री मंत्र 24 अक्षरों से बना है और यह सारे अक्षर  हमारे शरीर के 24 ग्रंथियों (Glands) से जुड़े हैं । जो इनके उच्चारण के बाद सक्रिय (Activate) हो जाते हैं और दिमाग की शक्तियों को जागृत कर देते हैं। जब इन 24  बिंदुओं (Points) पर मंत्र की वजह से कम्पन्न होती है  तो ध्वनि की तरंग (Sound Waves) उन महत्वपूर्ण ग्रंथियों (Important Glands) को स्वस्थ रखने में बहुत मदद करती हैं । 

            गायत्री मंत्र के जाप से एक लाख दस हजार तरंग ध्वनि प्रति सेकंड (Sound Wave per Second) निकलती है। साइंटिस्ट के मुताबिक यह हमारे शरीर के लिए बहुत ही हैल्दी और हेल्पफुल मानी जाती हैं। 

            अमेरिका के एक बहुत फेमस डॉक्टर हैं जो ध्वनि तरंगों (Sound Waves) से उपचार(Treatment) करते हैं। उन्होंने भी माना है की इस मंत्र का उच्चारण कई बड़ी बीमारियाँ तक ठीक कर देता है । 

            बहुत से लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि गायत्री मंत्र को ठीक से ना जपने की वजह से काफी नुकसान हो सकता है।इसको विधि विधान के साथ ही करना चाहिए। तो इस बात के लिए मार्कंडेय ऋषि ने कहा है गायत्री मंत्र किसी भी प्रकार से करने से अंदर से शुद्ध होते हैं और सभी इच्छाएं पूरी होती हैं । हालाकि इसका अनुष्ठान करने से लाभ ज्यादा मिलता है। पर इसका मतलब यह नहीं की विधि के साथ ना करने से नुकसान होता है।

            गायत्री मंत्र को करने का सही समय प्रभात और संध्या का समय होता है। मतलब सुबह के चार बजे से आठ बजे के बीच और शाम को चार बजे से आठ बजे के बीच का समय। 

            गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। देखिए जब इस मंत्र की ताकत को दुनिया के बड़े-बड़े सांइटिस्ट लोग मान चुके हैं तो इस मंत्र का जाप करते हुए कभी शर्माना नही चाहिए। आप कहीं पर भी हो चाहे आप घर पर हो स्कूल में हो या ऑफिस में हो या आप कुछ भी काम कर रहे हों मन ही मन में इसका जाप करते रहिए। साइंटिस्ट तक मानते हैं और डॉक्टर तक मानते हैं कि यह हमारी बॉडी और हेल्थ के लिए बहुत उपयोगी है। 

आपको यह हमारी ये पोस्ट पसंद आई हो तो सबके साथ शेयर कीजिए लोगों को पता लग सके इस मंत्र की असली ताकत का।

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